
रायपुर/सुकमा, 01 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र सालातोंग अब बदलाव की नई मिसाल पेश कर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व और ‘नियद नेल्लानार’ योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से इस दूरस्थ अंचल के ग्रामीणों को दशकों पुराने पेयजल संकट से स्थाई मुक्ति मिल गई है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत अब सालातोंग के हर घर तक स्वच्छ पेयजल की पहुंच सुनिश्चित हो गई है।
नाले के गंदे पानी से मिली आजादी
जिला मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर दूर स्थित सालातोंग गांव लंबे समय तक बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसता रहा। यहाँ के 80 से अधिक परिवार अपनी प्यास बुझाने के लिए एक छोटे से नाले पर निर्भर थे। गर्मियों के दिनों में स्थिति और भी विकट हो जाती थी, जब नाला सूखने की कगार पर होता था और महिलाओं को पानी के लिए मीलों का सफर तय करना पड़ता था। कलेक्टर अमित कुमार के दिशा-निर्देशों के बाद प्रशासन ने यहाँ युद्ध स्तर पर काम किया और 100 नल कनेक्शन का लक्ष्य पूरा कर ग्रामीणों के घरों तक गंगा पहुँचाई।
‘जल बहिनियों’ ने संभाली कमान
इस मिशन की खास बात यह है कि इसमें स्थानीय महिलाओं की भागीदारी को प्राथमिकता दी गई है। गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिनों को ‘जल बहिनियों’ के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। ये महिलाएं सोलर आधारित सिस्टम और हैंडपंपों के पानी की नियमित जांच करती हैं, जिससे जलजनित बीमारियों पर लगाम लगी है।
ग्रामीणों के जीवन में आई मुस्कान
गांव के बुजुर्गों और महिलाओं का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनके दुर्गम इलाके में नल से पानी आएगा। अब घर के आंगन में ही शुद्ध पानी मिलने से समय की बचत हो रही है और स्वास्थ्य में भी सुधार हुआ है। सालातोंग की यह सफलता कहानी इस बात का प्रमाण है कि सरकारी इच्छाशक्ति हो तो नक्सलवाद के साये को पछाड़कर विकास की रोशनी हर कोने तक पहुँच सकती है।











