बलौदाबाजार, 7 मई 2026 /
आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित करने और गिरते भू-जल स्तर को बचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई मुहिम अब धरातल पर बड़े सकारात्मक परिणाम दिखा रही है। प्रशासन की दूरदर्शी सोच और जन-भागीदारी के समन्वय से जिले ने जल संचयन एवं संवर्धन के क्षेत्र में देश भर में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।
कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन एवं सीईओ जिला पंचायत सुश्री दिव्या अग्रवाल के नेतृत्व में जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए संचालित ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान 2.0 एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। इस महत्वाकांक्षी अभियान के अंतर्गत अब तक जिले के 722 गांव, 517 ग्राम पंचायत और 9 नगरीय क्षेत्रों में कुल 87,137 जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इनमें सोख्ता गड्ढे, चेक डैम, तालाबों का गहरीकरण और रूफ-टॉप हार्वेस्टिंग जैसे कार्य शामिल हैं। इन संरचनाओं के माध्यम से बारिश के पानी को बहकर व्यर्थ जाने से रोककर सीधे जमीन के भीतर उतारा जा रहा है।
प्रमुख जल संचयन संरचना निर्माण कार्य: कैच द रैन – जल शक्ति अभियान 2.0

जल शक्ति अभियान के तहत जिले में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन के कुल 87,173 कार्यों की प्रविष्टि जेएसए-सीटीआर पोर्टल में की गई है। इसके अंतर्गत हुए मुख्य कार्य इस प्रकार हैं:
• रैन वाटर हार्वेस्टिंग और सोक पीट: 61,831 कार्य
• डबरी, कुंआ, तालाब, रिचार्ज पिट: 7,803 कार्य
• जल संसाधन विभाग: एनीकट, स्टॉप डेम, डायवर्सन और जलाशय के 21 कार्य
• वन विभाग (कैम्पा): एलबीसीडी, एससीटी, गाबिन और चेक डेम के 15,259 कार्य
• कृषि विभाग: बोरवेल रिचार्ज, सोक पीट और ट्रेंच के 1,153 कार्य
• अर्बन फंड: रैन वाटर हार्वेस्टिंग के 1,034 कार्य
• सीएसआर मद: तालाब गहरीकरण, आरडब्ल्यूएच और चेक डेम के 72 कार्य
• अमृत सरोवर: 51 नवीन तालाब एवं अमृत सरोवर शामिल हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि
जल प्रबंधन के क्षेत्र में किए गए विभिन्न संरचना निर्माण कार्यों की बदौलत वर्तमान में जिला राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे स्थान पर काबिज है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासन की कार्यकुशलता को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्र के किसानों, आम नागरिकों एवं गांवों में गठित ‘जल संचय वाहिनी’ के सक्रिय सहयोग का भी परिणाम है। इसके साथ ही जल संचय को जन आंदोलन का स्वरूप देकर लोगों को लगातार जागरूक भी किया जा रहा है।
भू-जल स्तर में सुधार और कृषि को लाभ
व्यापक स्तर पर बनाई गई इन संरचनाओं के कारण क्षेत्र के भू-जल स्तर में उल्लेखनीय सुधार होगा। इसका सीधा लाभ रबी और खरीफ दोनों फसलों के दौरान किसानों को मिलेगा। सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता बढ़ने से कृषि उत्पादकता में भारी वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रशासन का संकल्प
जिला प्रशासन द्वारा जल संरक्षण की यह प्रक्रिया सतत रूप से जारी रहेगी। आगामी मानसून से पहले 1 लाख से अधिक संरचनाओं को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि जिले के प्रत्येक गांव को जल के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाया जा सके।



















