
छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने राज्य में अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पेश कर दिया है। गृहमंत्री विजय शर्मा द्वारा पेश किए गए इस बिल में जबरन, प्रलोभन या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने वालों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया गया है।
कानून लाने की मुख्य वजह
राज्य के बस्तर और अन्य ग्रामीण अंचलों से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया है। सरकार का तर्क है कि:
• लालच और दबाव के जरिए सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ा जा रहा था।
• पुराने कानून (1968) में डिजिटल माध्यमों और आधुनिक प्रलोभनों को लेकर स्पष्टता की कमी थी।
• विभिन्न सामाजिक संगठनों ने लंबे समय से कड़े दंड की मांग की थी।
विधेयक की 5 बड़ी बातें (Key Highlights)
1. पूर्व सूचना अनिवार्य: यदि कोई स्वेच्छा से धर्म बदलना चाहता है, तो उसे 60 दिन पहले (प्रस्तावित नियमों के अनुसार) जिला मजिस्ट्रेट को सूचित करना होगा। इसके बाद 30 दिनों तक आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी।
2. सजा का प्रावधान: * सामान्य अवैध धर्मांतरण पर 7 से 10 साल की जेल और ₹5 लाख जुर्माना।
• नाबालिग, महिला, SC/ST के मामले में 10 से 20 साल की जेल और ₹10 लाख जुर्माना।
• सामूहिक धर्मांतरण पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और ₹25 लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
3. घर वापसी पर छूट: विधेयक में स्पष्ट है कि यदि कोई व्यक्ति अपने ‘पैतृक धर्म’ में वापस लौटता है, तो उसे धर्मांतरण की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।
4. डिजिटल निगरानी: सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल माध्यमों से दिए जाने वाले प्रलोभन को भी अपराध माना जाएगा।
5. गैर-जमानती अपराध: इस कानून के तहत दर्ज मामले संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-Bailable) होंगे।
सियासी घमासान: पक्ष बनाम विपक्ष
नोट: सदन में हंगामे के बीच विपक्ष ने इस बिल का विरोध करते हुए कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया है। सरकार का कहना है कि यह कानून किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि ‘धोखे’ के खिलाफ है।











