
महासमुंद | पिथौरा: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के विकासखंड पिथौरा का ग्राम पंचायत बड़ेलोरम आज ग्रामीण विकास और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की एक मिसाल बन गया है। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ के तहत संचालित ‘हर घर जल’ योजना ने यहाँ के ग्रामीणों की दशकों पुरानी पानी की समस्या को जड़ से खत्म कर दिया है।
संघर्ष से समाधान तक का सफर
एक समय था जब बड़ेलोरम की महिलाओं का आधा दिन हैंडपंपों की कतार में और दूर-दराज से पानी ढोने में बीत जाता था। ग्रामीणों के अनुसार, पहले पेयजल के लिए केवल हैंडपंप और अस्थायी जल स्रोतों का ही सहारा था। पानी लाने की इस मशक्कत में शारीरिक श्रम के साथ-साथ कीमती समय की भी भारी बर्बादी होती थी।
मजबूत बुनियादी ढांचा और निवेश
इस परिवर्तन को धरातल पर उतारने के लिए सरकार द्वारा व्यापक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया गया है:
• लागत: लगभग 93.17 लाख रुपये का निवेश।
• भंडारण: गांव में 60 किलोलीटर क्षमता की विशाल पानी टंकी (Overhead Tank) का निर्माण।
• नेटवर्क: हर गली और घर तक पानी पहुँचाने के लिए 3570 मीटर लंबी पाइपलाइन का जाल बिछाया गया।
• कवरेज: गांव के सभी 259 घरों में अब निजी नल कनेक्शन उपलब्ध हैं।
सामुदायिक भागीदारी और सुशासन
बड़ेलोरम की सफलता का एक बड़ा श्रेय यहाँ के ग्राम प्रबंधन को जाता है। सरपंच श्रीमती पदमा प्रधान और सचिव श्री सूरज साहू के नेतृत्व में ग्राम समिति ने जल वितरण की जिम्मेदारी बखूबी संभाली है।
विशेष उपलब्धि: 6 फरवरी 2026 को बड़ेलोरम को आधिकारिक तौर पर ‘हर घर जल’ प्रमाणित ग्राम घोषित किया गया।
योजना को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रत्येक परिवार से 60 रुपये प्रतिमाह जल शुल्क लिया जा रहा है। इस राशि का उपयोग पाइपलाइन की मरम्मत, बिजली बिल और ऑपरेटर के मानदेय के लिए किया जा रहा है, जिससे भविष्य में भी जलापूर्ति बाधित न हो।
बदल गया जीवन स्तर: हितग्राहियों की जुबानी
गांव की निवासी नागबाई कहती हैं, “पहले पानी के लिए बहुत भटकना पड़ता था, अब घर के आंगन में ही नल से शुद्ध पानी मिलता है। इससे न केवल थकान कम हुई है, बल्कि बचे हुए समय का उपयोग हम घर के अन्य कार्यों और खेती-बाड़ी में कर पा रहे हैं।











