लाल आतंक का अंत: सुकमा बना नक्सल मुक्त, सुरक्षाबलों की अभेद्य रणनीति ने रचा इतिहास

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सुकमा: दशकों से हिंसा और खौफ का केंद्र रहे छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के लिए 31 मार्च 2026 की तारीख एक स्वर्णिम अध्याय बनकर उभरी है। पुलिस प्रशासन ने आधिकारिक रूप से सुकमा को ‘नक्सल मुक्त जिला’ घोषित कर दिया है। 1980 के दशक से चली आ रही अशांति का अब पूरी तरह खात्मा हो चुका है और इस दुर्गम क्षेत्र में अब गोलियों की गूंज की जगह विकास की सुगबुगाहट है।

शौर्य और रणनीति का संगम

साल 2012 में जिला बनने के बाद से ही सुकमा सुरक्षाबलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहा। लेकिन DRG, STF, CRPF और कोबरा बटालियन के जवानों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की मार को मात देते हुए नक्सलियों के गढ़ को ध्वस्त कर दिया। सरकार की नई रणनीति के तहत माओवादियों के सुरक्षित ठिकानों पर 23 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए, जिससे न केवल उनका नेटवर्क टूटा, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों में सुरक्षा का भाव भी जागा।

आंकड़ों में नक्सलियों की हार

पिछले दो सालों (जनवरी 2024 से मार्च 2026 तक) के भीतर सुरक्षाबलों ने सुकमा में नक्सलियों की कमर तोड़ दी:

  • 38 मुठभेड़: जवानों ने कुल 38 आमने-सामने की जंग लड़ी।
  • 84 ढेर: कुल 84 इनामी नक्सलियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया।
  •  गिरफ्तारी और सरेंडर: 478 नक्सलियों को सलाखों के पीछे भेजा गया, जबकि 743 ने मुख्यधारा में लौटते हुए हथियार डाल दिए।
  •  हथियारों की जब्ती: भारी मात्रा में AK-47, SLR और 137 घातक IED बरामद कर बड़ी साजिशों को नाकाम किया गया।

वो 3 निर्णायक ऑपरेशन जिन्होंने बदली तस्वीर

  1. ऑपरेशन बुर्कलंका (3 जनवरी 2026): किस्टाराम के जंगलों में जवानों ने 30-35 नक्सलियों के एम्बुश को नाकाम करते हुए 12 माओवादियों को ढेर किया। इसमें 60 लाख का इनामी वेट्टी मंगडू भी मारा गया।
  2. नेडूम-परिया मुठभेड़ (29 मार्च 2025): इस भीषण जंग में सुरक्षाबलों ने 17 नक्सलियों का सफाया किया, जिनमें एसजीसीएम जगदीश कुहरामी जैसे बड़े चेहरे शामिल थे।
  3. भंडारपदर और अन्य मिशन: नवंबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच चले सिलसिलेवार ऑपरेशनों में दर्जनों हार्डकोर नक्सली और आईईडी विशेषज्ञ मारे गए, जिससे माओवादी संगठन नेतृत्व विहीन हो गया।

विकास और विश्वास की जीत

सुकमा की इस आजादी के पीछे केवल बंदूकें नहीं, बल्कि विकास की सोच भी है। स्कूल, अस्पताल और सड़कों के जाल ने नक्सलियों के ‘ब्रेनवॉश’ कैंपों को बंद कर दिया। पुलिस प्रशासन का कहना है कि सुकमा अब बस्तर के अन्य जिलों के लिए एक रोल मॉडल है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए गश्त जारी रहेगी।

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Prashant Pandey
Author: Prashant Pandey

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