पिथौरा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब: रानी सती दादी के मंगलपाठ में हुआ दिव्य समागम: अंजलि अग्रवाल की प्रस्तुति ने मोहा मन

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पिथौरा (महासमुंद)।

नगर के डिपो स्थित ‘ओम ट्रेडर्स’ परिसर में शनिवार को आस्था और विश्वास का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री रानी सती दादी जी के पावन मंगलपाठ के अवसर पर पूरा पिथौरा शहर मानों झुंझुनूं के रंग में रंग गया था। दोपहर ठीक 3 बजे से शुरू हुए इस धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ, जो देखते ही देखते एक विशाल जनसमूह में बदल गया।

दोपहर 4 बजे से चरम पर पहुंची भक्ति की लहरकार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई, लेकिन दोपहर 4 बजे के बाद जब सरायपाली की सुप्रसिद्ध पाठ वाचिका अंजलि अग्रवाल ने मंच संभाला, तो माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। उन्होंने गणेश वंदना और दादी जी के आवाहन के साथ मंगलपाठ का प्रारंभ किया। जैसे-जैसे पाठ आगे बढ़ा, पंडाल में मौजूद सैकड़ों महिलाओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को भव्य रूप दे दिया। ढोल-मंजीरों की थाप और दादी के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा।

अद्भुत श्रृंगार और दिव्य दर्शन

आयोजन स्थल पर रानी सती दादी का अलौकिक दरबार सजाया गया था। फूलों और ज्योत से महकते दरबार ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंजलि अग्रवाल के भजनों पर महिलाएं झूमने को मजबूर हो गईं। चुनरी उत्सव और मेहंदी के भजनों ने समां बांध दिया। विशेष रूप से महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में हिस्सा लेकर इस आयोजन की शोभा बढ़ाई।

इतिहास और मान्यता: शक्ति स्वरूपा दादी जी

धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं के अनुसार, रानी सती दादी को ‘नारायणी देवी’ के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, वे महाभारत काल की उत्तरा का अवतार मानी जाती हैं। अपने पति की मृत्यु के बाद सती होने वाली नारायणी देवी ने अधर्म के विरुद्ध शक्ति का परिचय दिया था। राजस्थान के झुंझुनूं में उनका विश्व प्रसिद्ध मंदिर है। भक्तों का विश्वास है कि दादी जी की चौखट पर मांगी गई हर मुराद पूरी होती है, और यही अटूट श्रद्धा आज पिथौरा की सड़कों पर भी देखने को मिली।

दादी रसोई और सफल आयोजन

आयोजक ओमप्रकाश नंदकिशोर अग्रवाल और परिवार द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की व्यवस्थाएं सराहनीय रहीं। शाम करीब 7:30 बजे ‘दादी रसोई’ के माध्यम से महाप्रसाद का वितरण शुरू हुआ। आयोजकों ने बताया कि इस मंगलपाठ का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करना है। देर शाम तक चले इस कार्यक्रम ने पिथौरा के धार्मिक इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है।

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Prashant Pandey
Author: Prashant Pandey

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