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महासमुंद में ‘नशाखोरों’ की खैर नहीं: स्कूलों के पास तैनात होंगे ‘नोडल गुरुजी’ और ‘बाल जासूस’, 100 मीटर का दायरा होगा सील; पर क्या खुद नियम तोड़ रहे जिम्मेदार?

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महासमुंद में ‘नशाखोरों’ की खैर नहीं: स्कूलों के पास तैनात होंगे ‘नोडल गुरुजी’ और ‘बाल जासूस’, 100 मीटर का दायरा होगा सील; पर क्या खुद नियम तोड़ रहे जिम्मेदार?

महासमुंद:

यदि आप किसी स्कूल, कॉलेज या कोचिंग संस्थान के आसपास खड़े होकर बेफिक्री से धुएं के छल्ले उड़ा रहे हैं या हथेली पर तंबाकू-गुटखा रगड़ रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। आपके इस ‘धुआंधार’ शौक पर अब प्रशासन का परवाना बैठने जा रहा है। जिले के भीतर नशे के अवैध कारोबार और युवाओं में बढ़ती लत को जड़ से खत्म करने के लिए प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और कड़क योजना तैयार कर ली है।

दरअसल, कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सोमवार को ‘नशामुक्त भारत अभियान’ के तहत जिला स्तरीय समिति की एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-लेवल समीक्षा बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने सख्त लहजे में साफ कर दिया कि अब केवल कागजी कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि धरातल पर ‘महा-कड़े’ कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन का यह सख्त रुख जिले के नशे के सौदागरों और शौकीनों का सिस्टम हिलाने के लिए काफी है।

🚫 शिक्षण संस्थानों के आसपास 100 मीटर का ‘नो-स्मोकिंग ज़ोन’

कलेक्टर के कड़े निर्देशों के बाद अब प्रशासन फीता लेकर स्कूलों और कॉलेजों की घेराबंदी नापने की तैयारी में है। नियम के मुताबिक, किसी भी शिक्षण संस्थान के 100 मीटर के दायरे में सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, जर्दा या किसी भी प्रकार के मादक पदार्थों की बिक्री पर “पूर्ण लॉकडाउन” रहेगा।

कोटपा अधिनियम (तंबाकू नियंत्रण कानून) के नियमों को अब इतनी कड़ाई से लागू किया जा रहा है, जैसे परीक्षा हॉल में कोई सख्त इनविजिलेटर नकल पकड़ता है। जो भी दुकानदार या गुमटी संचालक इस दायरे में नशा बेचते पाया जाएगा, उस पर न केवल भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि उसकी दुकान भी सील की जा सकती है।

🔍 बड़ा खुलासा: जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं! (सूत्रों का दावा)

इस महा-अभियान के बीच एक बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक बात भी सामने आ रही है। विश्वस्त सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, जिले के कुछ स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में खुद वहां के शिक्षक, स्टाफ और संस्थान के संचालक ही नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि कई जिम्मेदार लोग खुद स्कूल परिसर के भीतर या 100 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में सरेआम धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करते नजर आते हैं।

जब बच्चों को सही राह दिखाने वाले ‘गुरुजी’ और संस्थान के मुखिया ही खुद इस लत के शिकार होंगे, तो वे छात्रों को नशामुक्त होने का पाठ कैसे पढ़ाएंगे? देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन के इस नए डंडे का असर इन जिम्मेदार ‘नशाखोरों’ पर कितना पड़ता है और क्या प्रशासन इनके खिलाफ भी उतनी ही निष्पक्षता से चालान काटने की हिम्मत दिखाएगा।

🕵️‍♂️ मेडिकल स्टोर्स पर ‘सीक्रेट सर्विस’ की पैनी नज़र

प्रशासन की नजर सिर्फ पान-ठेले और गुमटियों तक सीमित नहीं है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक फैले मेडिकल स्टोर्स की आड़ में होने वाली प्रतिबंधित और नशीली दवाइयों (सिरप, कैप्सूल, गोलियां) की अवैध बिक्री को रोकने के लिए प्रशासन अब ‘खुफिया’ जाल बिछा रहा है।

दवाई बेचने के बहाने युवाओं को नशे की गर्त में धकेलने वाले ब्लैक मार्केटियर्स के पीछे अब गुप्तचर लगा दिए गए हैं। ऐसे संदिग्ध मेडिकल स्टोरों का पूरा एक्स-रे किया जाएगा और दोषी पाए जाने पर सीधे जेल की हवा खानी पड़ेगी।

🧑‍🏫 ‘नोडल गुरुजी’ और ‘बाल जासूस’ संभालेंगे मोर्चा

इस पूरे महा-अभियान की सबसे अनोखी और तगड़ी रणनीति इसके जमीनी स्तर के क्रियान्वयन (Implementation) को लेकर है, जिसमें बच्चों और शिक्षकों को मुख्य भूमिका दी गई है:

नोडल अधिकारी (गुरुजी): प्रत्येक स्कूल के एक शिक्षक को ‘नोडल अधिकारी’ की विशेष कमान सौंपी जाएगी। अब ये गुरुजी सिर्फ क्लास में विषय नहीं पढ़ाएंगे, बल्कि स्कूल के ‘बैकबेंचर्स’, बाहर चक्कर काटने वाले संदिग्ध तत्वों और तंबाकू की लत से पीड़ित छात्रों पर अपनी तीखी नजर रखेंगे।

बाल जासूस (मास्टर वॉलंटियर): बच्चों को बचपन से ही नशे के दुश्मनों और इसके दुष्प्रभावों को पहचानने की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। स्कूल के होनहार छात्र ‘मास्टर वॉलंटियर’ की भूमिका में होंगे। यानी अगर स्कूल का कोई साथी या कोई बाहरी व्यक्ति परिसर के आसपास संदिग्ध हरकत या नशा करते दिखा, तो ये ‘छोटे जासूस’ तुरंत उसकी रिपोर्ट अपने नोडल गुरुजी या पैरेंट्स को सौंप देंगे।

इस पूरी मुहिम को सफल बनाने के लिए शिक्षक, अभिभावक और बच्चों के बीच एक मजबूत तालमेल (को-ऑर्डिनेशन) बिठाया जा रहा है। कलेक्ट्रेट की इस अहम बैठक में जिला पंचायत सीईओ सचिन भूतड़ा और अपर कलेक्टर रवि साहू सहित पूरी समिति के सचिव और सदस्य बिल्कुल ‘एक्शन मोड’ में नजर आए।

जनहित में जारी चेतावनी:

भैया, सीधे और साफ शब्दों में समझ लीजिए… अब सार्वजनिक जगहों या स्कूलों के पास “गुटखा थूकना” और “धुआं उड़ाना” आपकी सेहत के साथ-साथ आपकी जेब, इज्जत और नौकरी (अगर आप शिक्षक हैं) तीनों के लिए बेहद हानिकारक साबित होने वाला है। समय रहते अपनी आदतें सुधार लीजिए, क्योंकि अब प्रशासन की तीसरी आंख के साथ-साथ इन ‘छोटे जासूसों’ की तीखी नजर भी सीधे आप पर ही है!

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pithorawale
Author: pithorawale

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