Edition

मां वीणापाणि संगीत विद्यालय में लता मंगेशकर की जयंती मनाई गई

मां वीणापाणि संगीत विद्यालय में लता मंगेशकर की जयंती मनाई गई

*सरायपाली/-* संगीत विद्यालय का प्रांगण महकती हुई धूपऔर सुरमई गूंज से सराबोर था।अवसर था सूर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की पावन जयंती का।मां वीणापाणि संगीत विद्यालय बस्ती सरायपाली(सरायपाली)ने भारतीय संगीत की अमरआवाज,अनमोल धरोहर लता मंगेशकर की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उनके कालजयी गीतों के माध्यम से उन्हें नमन किया।कार्यक्रम का शुभारंभ लता मंगेशकर की तैलीय चित्र पर दीप प्रज्वलित कर किया गया। तत्पश्चात विद्यालय के विद्यार्थियों एवं शिक्षार्थियों ने लता की अतुलनीय गीतों की अनूठी सरिता एवं त्रिवेणी बहाई।जैसे ही हारमोनियम पर पहली तान गुंजी और तबले की थाप ने संग दिया,पूरा विद्यालय एक दिव्य शांति में डूब गया।विद्यार्थियों ने जब अपनी सुरीली आवाज में लता जी के भजनों और गीतों को गाना शुरू किया तो ऐसा लगा जैसे हवाओं में मिश्री घुल गई हो।नाम गुम जाएगा चेहरा यह बदल जाएगा,मेरी आवाज ही पहचान है,रहें ना रहें हम महका करेंगे,अजीब दास्तां है ये,तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं,और सत्यम शिवम सुंदरम की पंक्तियां जब गूंजी तो सबकी आंखें नम हो गई।वह केवल एक प्रस्तुति नहीं बल्कि सुरों के माध्यम से एक सात्विक प्रार्थना थी जो मधुर स्मृति के साथ सीधे उस महान आत्मा के चरणों में समर्पित हो रही थी।

इस अवसर पर विद्यालय के संचालक जन्मजय नायक ने कहा संगीत और कला के क्षेत्र में स्वर साध्वी लता मंगेशकर काअप्रतिम योगदान भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर है। लता की अप्रतिम,अद्वितीय,अनूठी आवाज संगीत को नव प्राण प्रदान कर समृद्ध करती है।लता की आवाज ने इस देश की पीढ़ियों को भावनाओं के ऐसे संसार में जोड़ा जहां प्रेम,भक्ति और देशभक्ति के सुर एक साथ गूंजते हैं।नायक ने आगे कहा “महान स्वर कभी भी मृत्यु के साथ समाप्त नहीं होते बल्कि वह स्मृतियों में जीवित रहते हैं।”पीढ़ियां बदलेंगी और समय आगे बढ़ेगा मगर लता की आवाज हर दौर में किसी ने किसी रूप में लौटती रहेगी।लता जी की जगह को कभी भरा नहीं जा सकता,वह कल भी संगीत का पर्याय थींऔर आने वाले सदियों तक बनी रहेंगी। उनका योगदान युग-युगांतर तक स्मरणीय रहेगा।

प्राचार्य सुकनाथ चौहान ने कहा लता की जयंती हम सभी को उनके विराट योगदान को याद करने का एक अवसर देती है। संगीत के इस साधना केंद्र में उनके गीतों को पुनर्जीवित करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। लता का संपूर्ण जीवन यह बताता है कि एक कलाकार केवल अपनी उपलब्धियों से बड़ा नहीं होता,वह तब एक मानक बनता है जब उसकी साधना और प्रतिभा समय की हर कसौटी पर खरी उतरती है।उन्होंने गायन कला को सूर और ताल से आगे बढ़ाकर भावों की एक ऐसी भाषा दी,जिसे हर पीढ़ी ने महसूस किया।वे सुर साधना के स्वर्ण हस्ताक्षर हैं,उन्होंने भारतीय संगीत को नई दिशा दी है।

विद्यालय के अन्य शिक्षकों ने लता के कड़े रियाज,उनकी सादगी और संगीत के प्रति उनके समर्पण के संस्मरण साझा करते हुए कहा भौतिक रूप से भले ही वे हमारे बीच न हों लेकिन अपनी दिव्य आवाज के माध्यम से हर संगीत प्रेमी के दिल की धड़कन बनकर हमेशा जीवित रहेंगी।इस अवसर पर विद्यार्थी,शिक्षार्थी,शिक्षक और अनेक संगीत प्रेमी उपस्थित

थे।

विज्ञापन

 

Pithora wale
Author: Pithora wale

..

विज्ञापन

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!