
रायपुर, 30 मार्च 2026:
असम की वेटलिफ्टर पल्लवी पायेंग के लिए खेल के मैदान पर वापसी करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। जब उनकी बेटी महज छह महीने की थी, तब उनके सामने अपने करियर और ममता के बीच चुनाव करने की कठिन चुनौती थी। पल्लवी ने अपने सपनों को चुना और आज उसी कड़े संघर्ष का परिणाम है कि उन्होंने रायपुर में आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में महिलाओं के 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक (Silver Medal) जीतकर इतिहास रच दिया है।
परिवार का मिला अटूट सहयोग
असम की मिसिंग जनजाति से ताल्लुक रखने वाली पल्लवी की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा हाथ है। उनके पति सुखावन थौमंग, जो खुद एक पूर्व राष्ट्रीय मुक्केबाजी पदक विजेता हैं और वर्तमान में जम्मू में सीमा सुरक्षा बल (BSF) में तैनात हैं, उन्होंने पल्लवी को हमेशा प्रेरित किया। वहीं, पल्लवी की मां ने बच्ची की पूरी जिम्मेदारी संभाली ताकि वे अपनी ट्रेनिंग पर ध्यान दे सकें।
भावुक कर देने वाला सफर
अपनी वापसी पर बात करते हुए पल्लवी ने बताया कि यह सफर आसान नहीं था। एक महिला ही समझ सकती है कि मां बनने के बाद दोबारा पूरी फिटनेस में लौटने के लिए किन शारीरिक और मानसिक परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। अपनी छह महीने की दूधमुंही बच्ची को घर छोड़कर ट्रेनिंग के लिए जाना एक अत्यंत भावुक फैसला था, लेकिन उन्हें विश्वास था कि यही सही समय है।
वर्तमान में उनकी चार साल की बेटी, पल्लवी के सरूपथार स्थित किराए के घर और गोलाघाट जिले के बोरपाथार में अपनी नानी के घर के बीच समय बिताती है, जो आपस में लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर हैं।
असफलता से सफलता की ओर
पल्लवी ने साल 2018 में वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की थी, लेकिन कोविड-19 और मातृत्व के कारण उनके खेल की रफ्तार रुक गई थी। 2023 में गोलाघाट राज्य चैंपियनशिप में वे छठे स्थान पर रहीं और अगले साल डिब्रूगढ़ में भी उन्हें निराशा हाथ लगी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2025 में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने तेजपुर राज्य चैंपियनशिप में चांदी तथा ‘अस्मिता लीग’ में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी दमदार वापसी दर्ज कराई।
भविष्य के लिए बढ़ा आत्मविश्वास

- रायपुर में मिली इस जीत पर पल्लवी ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का यह सिल्वर मेडल उनके करियर की एक बड़ी उपलब्धि है। इससे उन्हें यह आत्मविश्वास मिला है कि वे बड़े स्तर पर पदक जीतने की काबिलियत रखती हैं।










