
रायपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर सियासत चरम पर है। लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा कांग्रेस शासनकाल पर उठाए गए सवालों के बाद राज्य की राजनीति में उबाल आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जहां गृहमंत्री को खुली बहस की चुनौती दी है, वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस पर नक्सलियों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया है।
अमित शाह का संसद में कड़ा प्रहार
संसद में चर्चा के दौरान अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में देरी की मुख्य वजह तत्कालीन कांग्रेस सरकार थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बघेल सरकार ने नक्सलियों को संरक्षण दिया। शाह ने तंज कसते हुए कहा, “भूपेश बघेल को प्रमाण चाहिए क्या? अगर हाँ बोलेंगे तो फंस जाएंगे।” उन्होंने बताया कि 2023 में भाजपा सरकार आने के बाद ही नक्सल विरोधी अभियान में तेजी आई है।
भूपेश बघेल की खुली चुनौती
अमित शाह के बयानों को ‘झूठ’ करार देते हुए भूपेश बघेल ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अमित शाह देश को गुमराह कर रहे हैं। बघेल ने चुनौती देते हुए कहा, “अमित शाह मंच, समय और स्थान तय कर लें, मैं इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार हूं।” उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने आदिवासियों का विश्वास जीता, 600 गांवों को नक्सल मुक्त कराया और शिक्षा-स्वास्थ्य के जरिए मुख्यधारा से जोड़ा।
सीएम विष्णुदेव साय का तीखा पलटवार
बघेल के दावों को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि दिसंबर 2023 तक छत्तीसगढ़ में 75% नक्सलवाद जीवित था क्योंकि तत्कालीन सरकार की नीयत साफ नहीं थी। सीएम ने एक कदम आगे बढ़ते हुए राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल गांधी ने नक्सलियों से मुलाकात की थी। साय ने कहा कि दुर्दांत नक्सली हिडमा के मारे जाने पर राहुल गांधी के ट्वीट ने उनकी मंशा साफ कर दी है।
मुख्य बिंदु:
• सरकार का दावा: छत्तीसगढ़ में अब हथियारबंद नक्सलवाद अंतिम सांसें ले रहा है।
• बघेल का तर्क: हमारी नीतियों की वजह से 600 गांव नक्सलवाद के चंगुल से बाहर आए।
• विष्णुदेव साय का आरोप: राहुल गांधी और कांग्रेस का नक्सलियों के प्रति नरम रुख रहा है।











