
महासमुंद, 08 अप्रैल 2026
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पायलट परियोजना ‘नाव्या’ के माध्यम से महासमुंद जिले में किशोरियों के सशक्तिकरण की नई इबारत लिखी जा रही है। इस योजना के तहत 16 से 18 वर्ष की उन बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है, जिन्होंने किन्हीं कारणों से स्कूल छोड़ दिया था। इन किशोरियों को कौशल विकास से जोड़कर स्वरोजगार के लिए तैयार किया जा रहा है।
परियोजना के सफल संचालन हेतु आईटीआई लभराखुर्द को मुख्य प्रशिक्षण केंद्र बनाया गया है। यहाँ 18 मार्च से सिलाई एवं कढ़ाई का विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के पहले चरण में कुल 60 किशोरियों का चयन किया गया है, जिन्हें सिलाई की बारीकियों के साथ-साथ सैद्धांतिक ज्ञान भी दिया जा रहा है।
मुख्य उद्देश्य:
• शाला त्यागी बालिकाओं को हुनरमंद बनाकर समाज की मुख्यधारा में लाना।
• आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करना ताकि वे स्वयं का रोजगार शुरू कर सकें।
• कौशल विकास के जरिए भविष्य के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये बालिकाएं न केवल खुद का काम शुरू कर पाएंगी, बल्कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बन सकेंगी। इस संबंध में विस्तृत जानकारी हेतु इच्छुक व्यक्ति महिला एवं बाल विकास विभाग या कौशल विकास प्राधिकरण से संपर्क कर सकते हैं।











