
रायपुर | 9 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों के आर्थिक शोषण के खिलाफ अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि शिक्षा के मंदिर को व्यापार बनाने वाले और अभिभावकों को मानसिक व आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने वाले निजी स्कूलों की ‘गुंडागर्दी’ अब छत्तीसगढ़ में नहीं चलेगी।
नियम तोड़े तो रद्द होगी मान्यता
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश का कोई भी निजी स्कूल सरकार और नियमों से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि शिकायतों के आधार पर जांच की जाएगी और यदि कोई भी स्कूल प्रबंधन दोषी पाया गया या नियमों का उल्लंघन करते मिला, तो केवल जुर्माना ही नहीं, बल्कि उस संस्थान के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने जैसी कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सीएम ने कड़े लहजे में कहा, “अभिभावक खुद को अकेला न समझें, हमारी सरकार उनके साथ ढाल बनकर खड़ी है।”
आर्थिक बोझ डालने वालों की खैर नहीं
अनावश्यक रूप से फीस वृद्धि, ड्रेस और किताबों के नाम पर कमीशनखोरी और अभिभावकों पर बनाए जा रहे दबाव पर प्रहार करते हुए श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश भर में निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर पैनी नजर रखी जाए। मुख्यमंत्री के इस तेवर से साफ है कि अब स्कूलों को मनमानी करना भारी पड़ने वाला है और सरकार शिक्षा के नाम पर होने वाले किसी भी समझौते को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।











