रुद्री स्थित रुद्रेश्वर धाम बनेगा धार्मिक एवं पर्यटन का नया केंद्र, श्रद्धालुओं को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं
धमतरी, 23 मई 2026।
धमतरी शहर से लगे ग्राम रुद्री स्थित प्राचीन रुद्रेश्वर Mahadev मंदिर परिसर के समग्र विकास की दिशा में बड़ी पहल की गई है। लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस महत्वाकांक्षी कॉरिडोर परियोजना को भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय के माध्यम से तीन चरणों में विकसित किया जाएगा। परियोजना में पारंपरिक भारतीय मंदिर स्थापत्य शैली के साथ आधुनिक सुविधाओं का समावेश किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को बेहतर आध्यात्मिक एवं पर्यटन अनुभव मिल सके।
धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक सुविधाओं के समन्वय से ग्राम रुद्री स्थित प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर परिसर को नया स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस महत्वाकांक्षी कॉरिडोर परियोजना को भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय के माध्यम से तीन चरणों में विकसित किए जाने की योजना तैयार की गई है।
धमतरी शहर से लगे रुद्री स्थित रुद्रेश्वर धाम को धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने हेतु तैयार किए गए वास्तु एवं अधोसंरचना आधारित प्रस्ताव में पारंपरिक भारतीय मंदिर स्थापत्य शैली के साथ आधुनिक सुविधाओं का संतुलित समावेश किया गया है। परियोजना का उद्देश्य मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुविधाजनक एवं आकर्षक वातावरण उपलब्ध कराना है।
प्रस्तावित डिजाइन में मंदिर के मुख्य फेशियल फसाड को पारंपरिक शिव मंदिर शैली के अनुरूप विकसित करने पर विशेष फोकस किया गया है। इसमें शिखर, त्रिशूल, ॐ प्रतीक, तोरण द्वार, अलंकृत स्तंभ, जाली कार्य, नंदी प्रतिमा एवं दीप स्तंभ जैसे पारंपरिक तत्व शामिल किए जाएंगे। प्राकृतिक सैंडस्टोन क्लैडिंग एवं पत्थर आधारित फिनिश के माध्यम से पूरे परिसर को भव्य, आकर्षक एवं कालातीत स्वरूप देने की योजना बनाई गई है।
परियोजना की खास बात यह है कि वर्तमान मंदिर संरचना को बिना किसी नुकसान और बड़े विध्वंस के सुरक्षित रखते हुए पूरे परिसर का सुव्यवस्थित विकास प्रस्तावित किया गया है। इसके अंतर्गत प्रवेश द्वार, सीढ़ियां, परिक्रमा पथ, घाट, मंडप एवं सार्वजनिक उपयोग क्षेत्रों का सुनियोजित निर्माण किया जाएगा।
श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए परिसर में चौड़े पैदल मार्ग, डिजिटल सूचना स्क्रीन, विश्राम क्षेत्र, प्रसाद एवं स्मृति चिन्ह दुकानें, फूड कोर्ट, शिशु आहार कक्ष, भुगतान आधारित स्वच्छ शौचालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा एआई आधारित हेल्थ चेकअप कियोस्क जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। वहीं वृद्धजनों एवं दिव्यांगजनों के लिए रैम्प आधारित बाधारहित आवागमन व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
घाट क्षेत्र को सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित स्वरूप देने के लिए रेलिंग युक्त विसर्जन कुंड तैयार किया जाएगा, जिससे धार्मिक गतिविधियां सुरक्षित तरीके से संचालित हो सकें। साथ ही श्रद्धालुओं के बैठने के लिए घाट किनारे पर्याप्त बैठक व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।
परियोजना में गार्डन, रिवर फ्रंट कॉटेज, सांस्कृतिक मंडप, खुला मंच तथा भविष्य में आकर्षक मेरीन ड्राइव विकसित करने की अवधारणा भी शामिल की गई है, जिससे यह परिसर धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक एवं पारिवारिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सके।
पूरे लेआउट को वास्तु सिद्धांतों, पूर्वाभिमुख धुरी, प्राकृतिक वेंटिलेशन, खुले प्रांगण एवं श्रद्धालुओं की क्रमिक आध्यात्मिक यात्रा की अवधारणा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। डिजाइन में सोमनाथ मंदिर परिसर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर एवं जगन्नाथ कॉरिडोर जैसी भारतीय मंदिर स्थापत्य अवधारणाओं से प्रेरणा ली गई है, जिससे पारंपरिकता एवं आधुनिक शहरी नियोजन का संतुलित समावेश सुनिश्चित हो सके।
पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास को भी इस परियोजना का अहम हिस्सा बनाया गया है। इसके तहत सौर ऊर्जा आधारित पार्किंग शेड, ईवी चार्जिंग स्टेशन, वर्षा जल संचयन, प्राकृतिक प्रकाश एवं वायु संचार आधारित डिजाइन, हरित क्षेत्र विकास तथा अपशिष्ट प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं प्रस्तावित हैं। साथ ही स्थानीय एवं टिकाऊ निर्माण सामग्री के उपयोग को प्राथमिकता देकर स्थानीय कारीगरों एवं रोजगार को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
परिसर में यातायात एवं जनसंचार व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए पृथक प्रवेश एवं निकास मार्ग, सेवा पथ, आपातकालीन पहुंच मार्ग तथा श्रद्धालु केंद्रित संचलन प्रणाली विकसित की जाएगी। विस्तृत खुले प्रांगण एवं दृश्य धुरी आधारित योजना श्रद्धालुओं को सहज एवं आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करेगी।
राजस्व सृजन एवं दीर्घकालीन संचालन व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए स्वचालित टिकटिंग प्रणाली, पार्किंग प्रबंधन, ईवी चार्जिंग स्टेशन, चालक विश्राम क्षेत्र एवं उपयोग आधारित सुविधाओं का भी प्रावधान किया गया है।
उल्लेखनीय है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्रस्तुतीकरण संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों के समक्ष किया गया, जिसमें मंदिर परिसर को आदर्श धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय सार्वजनिक परिसर के रूप में विकसित करने की विस्तृत अवधारणा प्रस्तुत की गई।
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि रुद्रेश्वर महादेव मंदिर परिसर का विकास केवल अधोसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह क्षेत्र की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत एवं पर्यटन संभावनाओं को नई पहचान देने वाला महत्वपूर्ण प्रयास सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि परियोजना में पारंपरिक भारतीय स्थापत्य, पर्यावरणीय संतुलन एवं आधुनिक सुविधाओं का समन्वय करते हुए श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए विश्वस्तरीय अनुभव विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही स्थानीय संस्कृति, लोक कला एवं क्षेत्रीय पहचान को संरक्षित रखते हुए यह परिसर आने वाले समय में धमतरी जिले की सांस्कृतिक पहचान के रूप में स्थापित होगा।



















