महासमुंद | जिले में करोड़ों रुपये के एलपीजी गैस गबन मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। लंबे समय से फरार चल रहे ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक संतोष सिंह ठाकुर एवं डायरेक्टर सार्थक सिंह ठाकुर को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस पूछताछ में इस हाईप्रोफाइल मामले से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।
कार्यालय पुलिस अधीक्षक महासमुंद द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, खाद्य अधिकारी अजय यादव इस पूरे खेल के मुख्य षड्यंत्रकारी थे, जबकि पंकज चंद्राकर को सामने रखकर पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। मामले में मनीष चौधरी की मुख्य मध्यस्थता सामने आई है, जिसने विभिन्न एजेंसियों के बीच रकम और सौदेबाजी को लेकर संपर्क साधा था।
1 करोड़ 30 लाख की पहली डिमांड, 90 लाख में तय हुआ सौदा
जांच में खुलासा हुआ है कि गबन मामले में शुरुआत में 1 करोड़ 30 लाख रुपये की मांग रखी गई थी। करीब एक सप्ताह तक चली बातचीत और मोलभाव के बाद 90 लाख रुपये में पूरा सौदा तय हुआ। पुलिस के अनुसार आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे और गिरफ्तारी से बचने के लिए कई मोबाइल नंबर तथा सिम कार्ड भी बदलते रहे।
11 शहरों के टॉवर डंप और सीडीआर से पुलिस पहुंची आरोपियों तक
महासमुंद पुलिस ने इस मामले में तकनीकी जांच का सहारा लिया। पुलिस ने 11 शहरों के टॉवर डंप, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), टोल प्लाजा डेटा, फॉरेंसिक ट्रांजेक्शन ट्रैकिंग और सोशल मीडिया एनालिसिस के जरिए आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की।
चार अलग-अलग टीमों का गठन कर विभिन्न राज्यों और शहरों में दबिश दी गई, जिसके बाद दोनों आरोपियों को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार किया गया।
19 मार्च से शुरू हुई थी गबन की साजिश
पुलिस जांच में सामने आया कि इस पूरे गबन की योजना 19 मार्च से ही तैयार कर ली गई थी। आरोपियों ने जानबूझकर एलपीजी कैप्सूल ट्रकों का समय पर वजन नहीं कराया और सभी कैप्सूल खाली होने के बाद 6 से 8 अप्रैल के बीच ट्रकों का वजन कराया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी एवं कूटरचित तौल पंचनामा तैयार किए गए। इतना ही नहीं, खाद्य विभाग कार्यालय में इन फर्जी पंचनामों पर हस्ताक्षर भी करवाए गए।
आपदा का फायदा उठाकर बेची गई गैस
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने आपदा की स्थिति का फायदा उठाते हुए गबन की गई एलपीजी गैस को लगभग 20 विभिन्न एजेंसियों और संस्थानों को कच्चे बिलों पर बिना जीएसटी के बेचा।
अप्रैल महीने में जहां केवल 40 टन एलपीजी खरीदी दर्शाई गई, वहीं 135 टन गैस की बिक्री सामने आई। इससे पूरे नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ऐसे सामने आया पूरा मामला
थाना सिंघोड़ा में अपराध क्रमांक 96/26 धारा 305(ई), 287(5), 221, 351(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच में पाया गया कि जयपुर से तीन एलपीजी कैप्सूल ट्रक महासमुंद पहुंचे थे।
इन ट्रकों में भरी गैस को रास्ते में ही निकाल लिया गया और बाद में सुरक्षा के नाम पर ट्रकों को अलग-अलग स्थानों पर खड़ा कर दिया गया। इसके बाद ट्रकों को खाली दर्शाते हुए पूरा फर्जीवाड़ा किया गया।
77 लाख रुपये की 87 टन गैस का गबन
पुलिस जांच के अनुसार लगभग 87 टन एलपीजी गैस, जिसकी कीमत करीब 77 लाख रुपये बताई गई है, ठाकुर पेट्रोकेमिकल के माध्यम से बेची गई। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(3), 316(5), 61, 238, 336(3), 338 एवं 340(2) के तहत भी अपराध दर्ज किया है।
गिरफ्तार आरोपी
वर्तमान गिरफ्तारी
1 संतोष सिंह ठाकुर, उम्र 57 वर्ष, निवासी रायपुर
2 सार्थक सिंह ठाकुर, उम्र 27 वर्ष, निवासी रायपुर
पूर्व में गिरफ्तार आरोपी
1 निखिल वैष्णव
2 पंकज चंद्राकर
3 मनीष चौधरी
4 अजय कुमार यादव
पुलिस का दावा – अभी और होंगे बड़े खुलासे
महासमुंद पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। पूछताछ में लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं और आने वाले दिनों में आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है। पुलिस आर्थिक लेन-देन, गैस सप्लाई ने
टवर्क और विभागीय मिलीभगत की भी गहन जांच कर रही है।



















