चकरदा में बाल संस्कार केन्द्र का आयोजन
बच्चों को दी गई संस्कृति, नैतिक शिक्षा व चरित्र निर्माण संबंधी जानकारी
सरायपाली। भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं संस्कारों के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से ग्राम चकरदा में दुर्गा वाहिनी के द्वारा एक दिवसीय बाल संस्कार केंद्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं, मातृशक्ति तथा बालक-बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे दिन चले इस आयोजन में बच्चों को भारतीय संस्कृति, नैतिक शिक्षा एवं चरित्र निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई, वहीं माताओं एवं बहनों को परिवार और समाज में संस्कारों की भूमिका के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि समाज सेविका एवं विश्व हिंदू परिषद की जिला संयोजिका अनिता चौधरी थीं। अध्यक्षता ग्राम पंचायत चकरदा की सरपंच कौशल्या सिदार ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में स्वाभिमान महिला कृषक कंपनी की डायरेक्टर हरिता पटेल उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन दुर्गा वाहिनी की जिला सह-संयोजिका ललिता सिदार एवं प्रखंड सह-संयोजिका विमला दास ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन तथा वंदना के साथ किया गया। इसके पश्चात बच्चों के लिए विभिन्न संस्कारपरक गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिनमें प्रेरक गीत, समूह खेल, देशभक्ति गीत, कहानी कथन, श्लोक पाठ, प्रार्थना तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल रहे। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में अनुशासन, सहयोग, राष्ट्रभक्ति, सेवा भावना एवं नैतिक मूल्यों के विकास का प्रयास किया गया। इस अवसर पर ललित पटेल ने महिलाओं के सशक्तिकरण विषय पर कहा कि समाज और राष्ट्र के विकास में मातृशक्ति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार संस्कारित होगा तो समाज स्वत: ही सशक्त और संगठित बनेगा। उन्होंने महिलाओं से अपने बच्चों को भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि श्रीमती चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों को संस्कारवान बनाना ही समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनमें बचपन से ही सेवा, अनुशासन, नैतिकता, राष्ट्रभक्ति एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने मातृशक्ति से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं बल्कि अच्छे संस्कार भी प्रदान करें, जिससे वे एक आदर्श नागरिक बन सकें। विशिष्ट अतिथि हरिता पटेल ने अपने उद्बोधन में बाल संस्कारों के महत्व पर विशेष जोर दिया। कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं में फागुनमोती, लीलावती, मोहरबाई, अन्नू पटेल, संतोषी पटेल सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति की सक्रिय सहभागिता रही। महिलाओं ने बौद्धिक सत्र में भाग लेकर भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों, सामाजिक समरसता एवं बच्चों के चरित्र निर्माण से संबंधित विषयों पर जानकारी प्राप्त की। उपस्थित महिलाओं ने ऐसे कार्यक्रमों को समय-समय पर आयोजित करने की आवश्यकता भी जाहिर की। अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, ग्रामीण महिलाओं, बच्चों एवं उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया गया।






















