छत्तीसगढ़ में ‘शराब’ की बोतलों पर साय सरकार का बड़ा फैसला; 1 अप्रैल से कांच नहीं, हाई-टेक PET बोतलों में मिलेगी मदिरा

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रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी नई आबकारी नीति (2026-27) के माध्यम से राज्य के राजस्व प्रबंधन और वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने जा रही इस नीति के तहत, अब प्रदेश में शराब की सप्लाई कांच की बोतलों के बजाय उच्च गुणवत्ता वाली प्लास्टिक (PET) बोतलों में की जाएगी।

सरकार का यह निर्णय शराब के परिवहन, भंडारण और उपभोक्ताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।

कुशल प्रबंधन और सुगमता पर केंद्रित फैसला

आबकारी विभाग के अनुसार, इस बदलाव के पीछे मुख्य उद्देश्य व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित बनाना है:

• शून्य टूट-फूट (Zero Breakage): कांच की बोतलें लोडिंग और अनलोडिंग के दौरान अक्सर टूट जाती हैं, जिससे न केवल राजस्व की हानि होती है बल्कि कचरे के कारण दुर्घटना का डर भी रहता है। प्लास्टिक बोतलें इस जोखिम को खत्म करेंगी।

• परिवहन में आसानी: PET बोतलें हल्की और टिकाऊ होती हैं, जिससे राज्य के दूरदराज के इलाकों तक सप्लाई पहुँचाना आसान और सुरक्षित होगा।

• ब्रांड अनुपालन: सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपयोग की जाने वाली बोतलें ‘फूड ग्रेड’ और ‘ब्रांड-अनुपालन’ मानकों के अनुसार होंगी, ताकि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।

पर्यावरण और स्वास्थ्य: सरकार की सक्रिय योजना

हालांकि, प्लास्टिक के उपयोग को लेकर उठ रही चिंताओं पर सरकार का रुख सकारात्मक और समाधान-परक है। नीति में इन चुनौतियों से निपटने के लिए भी प्रावधान किए जा रहे हैं:

1. ईको-फ्रेंडली रीसाइक्लिंग मॉडल: सरकार की योजना है कि इन खाली बोतलों के उचित निस्तारण के लिए एक मजबूत ‘कलेक्शन और रीसाइक्लिंग’ सिस्टम विकसित किया जाए। इससे न केवल प्रदूषण पर लगाम लगेगी, बल्कि रीसाइक्लिंग यूनिट्स के माध्यम से नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

2. मानकों का सख्त पालन: स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए आबकारी विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि उपयोग की जाने वाली प्लास्टिक उच्च गुणवत्ता वाली हो, जो शराब के रसायनिक गुणों पर कोई प्रभाव न डाले।

आर्थिक विकास और रोजगार की नई दिशा

बॉटलिंग क्षेत्र में बदलाव को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच, विशेषज्ञों का मानना है कि नई पैकेजिंग यूनिट्स की स्थापना से राज्य में तकनीकी निवेश बढ़ेगा। पुरानी कांच इकाइयों को आधुनिक PET इकाइयों में अपग्रेड करने के लिए भी सरकार प्रोत्साहन दे सकती है, जिससे रोजगार के नए और आधुनिक स्वरूप सामने आएंगे | 

निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ सरकार की यह नई पहल व्यवस्था को आधुनिक और जोखिम-मुक्त बनाने की एक कोशिश है। यदि रीसाइक्लिंग और कचरा प्रबंधन को कुशलता से लागू किया जाता है, तो यह नीति भविष्य में एक सफल मॉडल साबित हो सकती है।

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Prashant Pandey
Author: Prashant Pandey

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