
पिथौरा | नेशनल हाईवे 53 पर आए दिन होने वाले हादसों ने एक बार फिर वन्यजीवों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिया है। लेकिन इस बार, पिथौरा के ‘श्री गोविंद कमला गौधाम’ ने मानवता और जीव-सेवा की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने न केवल एक घायल वानर की जान बचाई, बल्कि सरकारी तंत्र को भी आईना दिखाया है।
हादसे में उजड़ा परिवार, गौधाम बना सहारा
करीब 6 दिन पहले नेशनल हाईवे पर एक अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने दो वानरों को अपनी चपेट में ले लिया था। इस दर्दनाक हादसे में एक नन्हे वानर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा वानर लहूलुहान हालत में तड़प रहा था।
गौधाम के संचालक मनीष अग्रवाल ने बताया कि सूचना मिलते ही उनकी रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। वानर की स्थिति देख हर कोई दहल गया; उसका जबड़ा बुरी तरह टूट चुका था, आंख फूट गई थी और मुंह से लगातार रक्तस्राव हो रहा था।
6 दिनों का संघर्ष और प्रशासनिक सक्रियता
गौधाम में चिकित्सकों और सेवादारों ने दिन-रात एक कर वानर का उपचार शुरू किया। 6 दिनों तक चले इस गहन उपचार के दौरान जब वानर ने भोजन ग्रहण करना शुरू नहीं किया, तब स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया।
“शुरुआत में विभाग की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली, लेकिन जब मामला उच्च स्तर तक पहुंचा, तब प्रशासन हरकत में आया।” — मनीष अग्रवाल, संचालक (गौधाम)
वन मंडल अधिकारियों की मौजूदगी में अब घायल वानर को विशेषज्ञ इलाज के लिए जंगल सफारी, रायपुर भेजा गया है।
100 किमी के दायरे में बेजुबानों की इकलौती उम्मीद
आज पिथौरा और आसपास के 100 किलोमीटर के क्षेत्र में ‘श्री गोविंद कमला गौधाम’ बेजुबानों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। सरकारी तंत्र की धीमी कार्यप्रणाली के विपरीत, यह गौधाम एक प्रमुख इमरजेंसी सेंटर बन चुका है। मनीष अग्रवाल और उनकी टीम के इस जज्बे की वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों द्वारा जमकर सराहना की जा रही है।












