लाखों की मरम्मत के बाद भी वन विभाग परिसर में अव्यवस्था, शराब की खाली बोतलों ने खड़े किए सवाल
पिथौरा | विशेष रिपोर्ट
पिथौरा स्थित वन विभाग के रेंजर कार्यालय और एसडीओ कार्यालय परिसर की वर्तमान स्थिति इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। एक ओर विभाग पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और वन संपदा के संरक्षण का संदेश देता है, वहीं दूसरी ओर कार्यालय परिसर में बड़ी संख्या में पड़ी शराब की खाली बोतलें और फैली गंदगी कई सवाल खड़े कर रही हैं।
जानकारी के अनुसार हाल ही में कार्यालय परिसर में रंग-रोगन, मरम्मत और रखरखाव कार्य पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे। विभागीय दस्तावेजों में भी इन कार्यों पर पर्याप्त राशि व्यय होने की बात सामने आती है। इसके बावजूद परिसर की मौजूदा तस्वीरें जमीनी हकीकत की अलग कहानी बयां करती दिखाई दे रही हैं।
मौके पर किए गए अवलोकन के दौरान परिसर के कई हिस्सों में शराब की खाली बोतलें, प्लास्टिक कचरा और अव्यवस्था देखने को मिली। ऐसे में आम लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब मरम्मत और सौंदर्यीकरण के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध था, तो परिसर की नियमित साफ-सफाई और निगरानी व्यवस्था पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि परिसर की नियमित मॉनिटरिंग और देखरेख होती, तो इस तरह की स्थिति सामने नहीं आती। लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि कहीं शासकीय परिसर असामाजिक तत्वों की गतिविधियों का केंद्र तो नहीं बनता जा रहा, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण यह हालात उत्पन्न हुए हैं।
गौरतलब है कि वन विभाग का यह परिसर एक महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालय है, जहां प्रतिदिन अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिक विभिन्न कार्यों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में परिसर के भीतर दिखाई दे रही यह स्थिति विभागीय कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।
क्षेत्रवासियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि कार्यालय परिसर में शराब की बोतलें कैसे पहुंचीं और लंबे समय तक वहां क्यों पड़ी रहीं। साथ ही मरम्मत और रंग-रोगन कार्य पर खर्च की गई राशि की गुणवत्ता और उपयोगिता की भी जांच होनी चाहिए।
ग्राउंड रिपोर्ट सामने आने के बाद अब लोगों की नजरें प्रशासन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हुई हैं। जनता यह जानना चाहती है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि कार्यालय परिसर की यह स्थिति है, तो आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी।
जनता के सवाल
• क्या रंग-रोगन और मरम्मत कार्य पर खर्च की गई राशि का सही उपयोग हुआ?
• क्या परिसर की नियमित सफाई और निगरानी की व्यवस्था है?
• शराब की खाली बोतलें कार्यालय परिसर तक कैसे पहुंचीं?
• क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी?
• क्या पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाएगी?
वन संरक्षण और स्वच्छता का संदेश देने वाले विभाग के परिसर में यदि इस प्रकार की तस्वीरें सामने आती हैं, तो यह केवल सफाई व्यवस्था का ही नहीं बल्कि जवाबदेही और निगरानी प्रणाली का भी गंभीर विषय बन जाता है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इस मामले पर क्या कदम उठाते हैं।



























