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रायपुर में स्वास्थ्य का ‘काला खेल’: मनोरोग और पुनर्वास के नाम पर अपनों को ही ‘बंधक’ बनाने का सनसनीखेज धंधा, सूत्रों का बड़ा दावा

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रायपुर में स्वास्थ्य का ‘काला खेल’: मनोरोग और पुनर्वास के नाम पर अपनों को ही ‘बंधक’ बनाने का सनसनीखेज धंधा, सूत्रों का बड़ा दावा

विशेष संवाददाता, रायपुर

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और स्मार्ट सिटी नया रायपुर इन दिनों एक ऐसे खौफनाक और अमानवीय काले कारोबार का केंद्र बन चुकी हैं, जिसे जानकर किसी की भी रूह कांप जाए। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इलाज, पुनर्वास और नशामुक्ति के नाम पर चल रहे कुछ बड़े क्लीनिकों और सेंटर्स में इंसानियत को तार-तार किया जा रहा है। यहाँ रिश्तों के विवाद और निजी स्वार्थ के चलते अपनों को ही ‘जिंदा दफन’ करने का एक संगठित रैकेट काम कर रहा है।

अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि जल्द ही इस पूरे सिंडिकेट का एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा होने जा रहा है, जिसमें कई रसूखदार चेहरे बेनकाब होंगे।

बिना कंसेंट के ‘अपहरण’: “एक हफ्ते का टेस्ट” बोलकर दो महीने की कैद

इस काले कारोबार का सबसे वीभत्स पहलू यह है कि यहाँ मरीज (पीड़ित) की मर्जी या सहमति (Consent) का कोई वजूद ही नहीं है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि पारिवारिक झगड़ों, संपत्ति विवाद या आपसी रंजिश के बाद परिवार के ही कुछ लोग मरीज को जबरदस्ती इन सेंटर्स में डाल देते हैं।

पीड़ितों को धोखा देने के लिए एक बेहद शातिर तरीका अपनाया जाता है। उन्हें झूठ बोला जाता है कि:

“बस एक हफ्ते की बात है, अस्पताल में आपके कुछ जरूरी टेस्ट होने हैं।”

लेकिन सूत्रों का दावा है कि जैसे ही पैरवीकार (परिजन) मोटी रकम देकर काउंटर पर साइन करते हैं, वैसे ही उस इंसान की आजादी हमेशा के लिए छिन जाती है। अंदर जाते ही सबसे पहले पीड़ित का फोन छीन लिया जाता है, ताकि वह बाहरी दुनिया या पुलिस से संपर्क न कर सके। एक हफ्ते के टेस्ट का झांसा देकर लोगों को दो-दो महीने तक अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा जा रहा है।

बेटी, पत्नी और मां से ‘छुटकारा’ पाने का सुरक्षित ठिकाना!

इस रैकेट का एक और घिनौना सच सोशल मीडिया और इंटरनेट के जरिए भी सामने आ रहा है। सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (जैसे pithorawale.com व अन्य) पर सक्रिय कुछ असामाजिक तत्वों और कड़ियों के जरिए लोग ऐसे सेंटर्स की तलाश करते हैं।

आज के दौर में कुछ लोग अपनी ही बेटी, पत्नी या बूढ़ी मां से पीछा छुड़ाने या उन्हें रास्ते से हटाने के लिए इन मनोरोग क्लीनिकों को ‘डंपिंग ग्राउंड’ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, बिना किसी ठोस मेडिकल हिस्ट्री या बिना किसी मानसिक बीमारी के, सिर्फ पैसों के दम पर स्वस्थ महिलाओं और पुरुषों को ‘पागल’ घोषित कर इन पुनर्वास केंद्रों के अंधेरे कमरों में ठंस दिया जाता है।

नशामुक्ति के नाम पर ‘ड्रग्स का ओवरडोज’: कभी ठीक न होने देने की साजिश

जो लोग इन केंद्रों में वाकई किसी सामान्य नशे की लत छोड़ने या डिप्रेशन के इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, उनके साथ जो खेल होता है, वह और भी डरावना है। अस्पताल के अंदरूनी सूत्रों ने जो खुलासे किए हैं, उसके अनुसार:

 हाई-पावर नशीली दवाइयां: मरीज को ठीक करने के बजाय, उन्हें ऐसी प्रतिबंधित और अत्यधिक पावर की नशीली दवाइयां (Psychotropic Drugs) दी जाती हैं, जिससे उनका दिमाग पूरी तरह सुन्न हो जाए।

 जानबूझकर ओवरडोज: दवाओं का ओवरडोज देकर मरीज को हमेशा के लिए पूरी तरह सेंटर्स और डॉक्टरों पर निर्भर बना दिया जाता है।

लाइफटाइम कस्टडी का गेम: सूत्रों का आरोप है कि साजिश यह होती है कि मरीज का मानसिक संतुलन कभी सुधर ही न पाए। वह जिंदगी भर उसी अस्पताल या पुनर्वास केंद्र की चारदीवारी में कैद रहे, ताकि अस्पताल का बिल भी बनता रहे और परिजनों का मकसद भी पूरा होता रहे।

रायपुर के पुनर्वास केंद्र रडार पर, जल्द होगा बड़ा खुलासा

यह पूरा नेटवर्क बेहद रसूखदार और शातिर लोगों द्वारा संचालित किया जा रहा है। रायपुर के कुछ नामचीन मनोरोग क्लीनिक और नया रायपुर में स्थित पुनर्वास केंद्र इस समय जांच एजेंसियों और खोजी पत्रकारों के रडार पर हैं। सूत्रों के अनुसार, बदनामी और कानूनी कार्रवाई के डर से फिलहाल किसी डॉक्टर या अस्पताल के नाम का औपचारिक खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन पुख्ता सबूत जुटाए जा चुके हैं।

बड़ा सवाल: क्या स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन इन कथित ‘कंसाइन्मेंट सेंटर्स’ की हकीकत से बेखबर है? या फिर इस काले धंधे को किसी ऊंचे स्तर का संरक्षण प्राप्त है?

सूत्रों की मानें तो जल्द ही इस मामले में कड़े कानूनी शिकंजे और बड़े खुलासे की उम्मीद है, जिसके बाद रायपुर के चिकित्सा जगत में एक बड़ा भूचाल आना तय है।

(Pithorawale.com न्यूज़ अलर्ट – रायपुर के इस काले कारोबार पर हमारी नजर लगातार बनी हुई है।)

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Author: pithorawale

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